<p style=”text-align: justify;”>ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने शुक्रवार (17 अप्रैल) को ऐलान किया कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आजादी बहाल करने के लिए दर्जनभर से ज्यादा देश रक्षा मिशन में शामिल होने को तैयार हैं. पेरिस में फ्रांस और ब्रिटेन ने 49 देशों की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें बहुराष्ट्रीय सुरक्षा मिशन की तैयारियों को लेकर चर्चा की गई. </p>
<p style=”text-align: justify;”>ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने लेबनान सीजफायर के बाद होर्मुज को कमर्शियल जहाजों के लिए खोल दिया है, लेकिन इसके साथ ही ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की अनुमति जरूरी कर दी गई है. ईरानी अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका द्वारा फ्रीज किए गए फंड को फ्री करना भी इस सौदे का हिस्सा है. </p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>होर्मुज को फिर से खोलना वैश्विक जरूरत- स्टार्मर</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>अमेरिकी नेवी ने अभी भी समुद्री सुरंगों के जोखिम की स्थिति स्पष्ट नहीं होने की बात कही है. ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि होर्मुज को फिर से खोलना एक वैश्विक जरूरत और जिम्मेदारी है. इसे आगे ले जाने के लिए अगले हफ्ते लंदन में एक सैन्य योजना सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. इसमें मिशन की संरचना और इसमें शामिल होने वाले देशों की संपत्ति और संसाधनों का ऐलान किया जाएगा. बता दें कि स्टार्मर ने फ्रांस, जर्मनी और इटली के साथ मिलकर इस अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया है.</p>
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<p style=”text-align: justify;”><strong>क्या बोला ईरान का विदेश मंत्रालय?</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग सिर्फ ईरान द्वारा तय जलमार्ग से ही मुमकिन होगी. IRGC ने निर्देश दिया है कि सभी जहाजों को गुजरने के लिए उनकी अनुमति लेनी होगी. नागरिक जहाजों को ईरानी रास्तों से जाने दिया जाएगा, लेकिन सैन्य जहाजों के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है. </p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>लेबनान में सीजफायर के बाद कुछ नरम हुआ ईरान</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>इसी बीच ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उनके बंदरगाहों पर अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी जारी रहती है, तो वह भी जवाबी कार्रवाई करेगा. विदेश मंत्रालय के मुताबिक अगर ईरान के आर्थिक हितों और बंदरगाहों को निशाना बनाना बंद नहीं किया गया तो वे अपनी कूटनीति में कठोर रुख अपनाएंगे. हालांकि, लेबनान में सीजफायर के बाद ईरान ने कुछ नरमी दिखाने के इशारे किए हैं. </p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>ये भी पढ़ें</strong></p>
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