Jamai Shashti 2026: जमाई षष्ठी पर्व क्या है ? जून में कब है ये, इसका महत्व और तारीख जानें

<p style=”text-align: justify;”><strong>Jamai Shashthi 2026:&nbsp;</strong>सनातन धर्म में पुत्री और पुत्री से संबंधित कई व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं क्या आप जानते हैं दामाद के लिए भी एक खास पर्व मनाया जाता है, जिसका नाम है जमाई षष्ठी. यह उत्सव बंगाली पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>इस दिन सास अपने दामाद का विशेष सम्मान करती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि के साथ-साथ बच्चों की लंबी आयु एवं अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं. इस साल <strong>जमाई षष्ठी 20 जून 2026</strong> को मनाई जाएगी. इस त्योहार का क्या महत्व है, कौन सी परंपरा निभाई जाती है जान लें.</p>
<p style=”text-align: justify;”><iframe title=”YouTube video player” src=”https://www.youtube.com/embed/jEMwmtNvMz0?si=GK49txlDsNoMFGj1″ width=”560″ height=”315″ frameborder=”0″ allowfullscreen=”allowfullscreen” data-mce-fragment=”1″></iframe></p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>जमाई षष्ठी क्यों मनाते हैं</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं में जमाई षष्ठी का विशेष स्थान है.यह पर्व दामाद को परिवार के अभिन्न सदस्य के रूप में सम्मान देने, उनकी खातिरदारी करने और रिश्तों को मजबूत करने के लिए किया जाता है. साथ ही संतान के उज्ज्वल भविष्य और परिवार की खुशहाली की कामना का भी प्रतीक माना जाता है. यह पर्व केवल एक पारिवारिक रस्म नहीं, बल्कि रिश्तों में प्रेम, सम्मान और आत्मीयता को मजबूत करने का अवसर भी माना जाता है.</p>
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<p style=”text-align: justify;”><strong>कैसे मनाते हैं जमाई षष्ठी</strong></p>
<ul style=”text-align: justify;”>
<li>जमाई षष्ठी के दिन सुबह सास स्नान कर विधि-विधान से षष्ठी देवी की पूजा करती हैं. मान्यता है कि षष्ठी देवी संतान की रक्षक और उनके सुख-स्वास्थ्य की अधिष्ठात्री देवी हैं.</li>
<li>पूजा के लिए विशेष थाल सजाई जाती है, जिसमें दूर्वा, पान के पत्ते, सुपारी, फल, फूल और मीठा दही जैसी सामग्री रखी जाती है.</li>
<li>जब बेटी और दामाद घर पहुंचते हैं, तो उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया जाता है. पूजा के जल का छिड़काव कर उनकी आरती उतारी जाती है.</li>
<li>इसके बाद दामाद के माथे पर दही का शुभ तिलक लगाया जाता है और रक्षा तथा दीर्घायु की कामना के साथ पवित्र धागा बांधा जाता है.</li>
<li>इन शुभ अनुष्ठानों के बाद ही उनका गृहप्रवेश कराया जाता है.</li>
</ul>
<p style=”text-align: justify;”><strong>स्वादिष्ट भोज से जताते हैं स्नेह</strong></p>
<ul style=”text-align: justify;”>
<li>जमाई षष्ठी के दिन बंगाल की परंपरा के अनुसार दामाद को आम, लीची, मिठाइयां और <a title=”मौसम” href=”https://www.abplive.com/weather” data-type=”interlinkingkeywords”>मौसम</a> के अन्य फलों का स्वाद चखाया जाता है.</li>
<li>इस अवसर पर बेटी और दामाद को नए वस्त्र तथा उपहार भेंट करने की भी परंपरा हैं.</li>
</ul>
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