<p style=”text-align: justify;”>आजकल स्मार्टफोन चार्ज करने के लिए यूजर्स के पास दो बड़े ऑप्शन हैं वायर्ड चार्जिंग और वायरलेस चार्जिंग. वायरलेस चार्जिंग देखने में काफी सुविधाजनक लगती है जबकि वायर्ड चार्जिंग को लंबे समय से भरोसेमंद ऑप्शन माना जाता है. लेकिन सवाल यह है कि फोन की बैटरी की सेहत के लिए दोनों में से कौन बेहतर है? इसका जवाब सिर्फ चार्जिंग की स्पीड पर निर्भर नहीं करता है बल्कि फोन कितना गर्म होता है और बैटरी कितनी देर तक हाई चार्ज लेवल पर रहती है यह भी मायने रखता है.</p>
<h3 style=”text-align: justify;”>वायर्ड चार्जिंग में क्या है खास?</h3>
<p style=”text-align: justify;”>आपको बता दें कि वायर्ड चार्जिंग में चार्जर और फोन के बीच सीधे केबल के जरिए बिजली पहुंचती है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें एनर्जी का नुकसान काफी कम होता है और अच्छी क्वालिटी के चार्जर के साथ फोन तेजी से चार्ज किया जा सकता है. आजकल कई स्मार्टफोन 67W, 80W, 100W या इससे भी ज्यादा फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करते हैं. हालांकि, ज्यादा पावर का मतलब हमेशा बैटरी के लिए बेहतर नहीं होता है. बहुत तेज चार्जिंग के दौरान फोन गर्म हो जाता है और लगातार ज्यादा टेंपरेचर बैटरी की पावर को खराब कर देती है.</p>
<h3 style=”text-align: justify;”>वायरलेस चार्जिंग में कहां है समस्या?</h3>
<p style=”text-align: justify;”>वायरलेस चार्जिंग में फोन और चार्जिंग पैड के बीच इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन के जरिए बिजली ट्रांसफर होती है. इसमें केबल लगाने की जरूरत नहीं पड़ती है इसलिए यह काफी सुविधाजनक है. लेकिन इसकी एक कमी गर्मी है. चार्जिंग के दौरान एनर्जी का कुछ हिस्सा हीट में बदल सकता है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>अगर फोन और चार्जिंग पैड सही तरीके से अलाइन न हों तो गर्मी और बढ़ सकती है. यही वजह है कि वायरलेस चार्जिंग के दौरान फोन का टेंपरेचर वायर्ड चार्जिंग के मुकाबले में कुछ कंडिशन में ज्यादा बढ़ जाता है.</p>
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<h3 style=”text-align: justify;”>बैटरी हेल्थ पर गर्मी का कितना असर?</h3>
<p style=”text-align: justify;”>स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरी के लिए बहुत ज्यादा टेंपरेचर सही नहीं माना जाता है. लंबे समय तक ज्यादा गर्मी में रहने से बैटरी की क्षमता धीरे-धीरे कम हो सकती है. इसलिए चार्जिंग टेक्नोलॉजी चुनते समय सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि फोन कितनी तेजी से चार्ज होता है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>अगर वायरलेस चार्जिंग के दौरान फोन बार-बार गर्म होता है तो रोजाना लंबे समय तक इसका इस्तेमाल बैटरी की लाइफ पर असर डाल सकता है. वहीं, अच्छी क्वालिटी वाली वायर्ड चार्जिंग में गर्मी को कंट्रोल रखना काफी हद तक आसान हो जाता है.</p>
<h3 style=”text-align: justify;”>कौन-सी चार्जिंग है बेहतर?</h3>
<p style=”text-align: justify;”>बैटरी हेल्थ को प्राथमिकता देने पर वायर्ड चार्जिंग आम तौर पर ज्यादा बेहतर ऑप्शन साबित हो सकता है. खासकर तब जब फोन को चार्ज करते समय टेंपरेचर कंट्रोल रहे. वहीं, वायरलेस चार्जिंग सुविधा के मामले में काफी आगे है और कभी-कभार या डेस्क पर फोन रखने के लिए यह बेहद कारगर साबित होता है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>हालांकि, असली फर्क चार्जिंग टेक्नोलॉजी से ज्यादा इस्तेमाल के तरीके से पड़ता है. फोन को ज्यादा गर्म होने से बचाना, खराब या नकली चार्जर से दूरी रखना और लंबे समय तक 100 प्रतिशत चार्ज पर रखने से बचना बैटरी के लिए ज्यादा जरूरी होता है.</p>
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