शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 · IST
Instagram WhatsApp Telegramलेखक: Adesh Gupta

चीन के हैकर्स का नया हथियार बना एआई: सिक्योरिटी टूल को ही बना दिया हैकिंग का जरिया, माइक्रोसॉफ्ट का दावा

टेक्नोलॉजी 23 अक्टू॰ 2026 · 08:01 ISTलेखक: Adesh Gupta
चीन के हैकर्स का नया हथियार बना एआई: सिक्योरिटी टूल को ही बना दिया हैकिंग का जरिया, माइक्रोसॉफ्ट का दावा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल जहां कंपनियां अपने सिस्टम को सुरक्षित बनाने के लिए कर रही हैं, वहीं साइबर अपराधी भी इसका गलत फायदा उठा सकते हैं। माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक, चीन से जुड़े एक हैकिंग ग्रुप ने AI आधारित सुरक्षा जांच टूल का इस्तेमाल करके आईटी सर्विस कंपनी कनेक्टवाइज (ConnectWise) को निशाना बनाया। इस हमले को दुनियाभर के सैकड़ों संगठनों तक पहुंचने वाले बड़े साइबर अभियान का हिस्सा बताया गया है। यह जानकारी माइक्रोसॉफ्ट ने अपनी सिक्योरिटी ब्लॉग पोस्ट में साझा की है। कनेक्टवाइज पर हमले के पीछे चीन से जुड़े ग्रुप का शक रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, माइक्रोसॉफ्ट ने हैकिंग ग्रुप की पहचान Storm-0940 के तौर पर की है। कनेक्टवाइज के सीईओ मैनी रिवेलो ने भी कहा कि माइक्रोसॉफ्ट की जांच और कंपनी की ओर से जुटाए गए सबूत इस ओर इशारा करते हैं कि हमले के पीछे चीन से जुड़ा एक ग्रुप हो सकता है। कनेक्टवाइज के मुताबिक, प्रभावित एप्लिकेशन कनेक्शन को अलग कर दिया गया है और सेवाओं को धीरे-धीरे बहाल किया जा रहा है। हालांकि, कंपनी ने चेतावनी दी कि इससे उन ग्राहकों के सिस्टम में पहले से हासिल किए गए अनधिकृत एक्सेस का खतरा अपने आप खत्म नहीं होता। हर ग्राहक के सिस्टम की अलग से जांच करनी होगी। यह मामला बताता है कि किसी एक आईटी सर्विस प्रोवाइडर पर हमला उसके कई ग्राहकों की सुरक्षा को भी प्रभावित कर सकता है। ARTEX AI टूल का कैसे हुआ इस्तेमाल? माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, Storm-0940 ने ARTEX नाम के ओपन-सोर्स फ्रेमवर्क का इस्तेमाल किया। यह टूल मूल रूप से पेनेट्रेशन टेस्टिंग के लिए बनाया गया है। पेनेट्रेशन टेस्टिंग में कंपनियां अपने नेटवर्क और सिस्टम की सुरक्षा जांचती हैं, ताकि कमजोरियों का पता लगाकर उन्हें ठीक किया जा सके। माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि ARTEX को अलग-अलग एआई मॉडल के साथ काम करने के लिए तैयार किया जा सकता है। इससे सुरक्षा जांच से जुड़े कई काम अपने आप किए जा सकते हैं। कुछ स्थितियों में यह कम मानवीय दखल के साथ टारगेट की मैपिंग करने और नेटवर्क से डेटा निकालने जैसे काम भी कर सकता है। यही वजह है कि इस तरह के टूल का गलत इस्तेमाल चिंता बढ़ाता है। सुरक्षा के लिए बनाए गए एआई टूल का इस्तेमाल हमले करने के लिए भी किया जा सकता है। रक्षा, बैंकिंग और मीडिया समेत कई सेक्टर निशाने पर माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक, इस अभियान में रक्षा, सैन्य, एयरोस्पेस और सरकारी संस्थानों को निशाना बनाया गया। इसके अलावा ऊर्जा, वित्त, मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, केमिकल, चिप, सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी सेक्टर भी टारगेट लिस्ट में थे। कानून से जुड़ी फर्मों, मीडिया संस्थानों, थिंक टैंक और गैर-लाभकारी संगठनों को भी निशाना बनाया गया। माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, ज्यादातर सेंध लगाने की कोशिशें सफल नहीं हुईं। फिर भी, कई संगठनों के क्लाउड सिस्टम में हैकर्स को उच्च स्तर का एक्सेस मिल गया। ऐसा एक्सेस खतरनाक हो सकता है, क्योंकि सिस्टम की सफाई और सुरक्षा उपायों के बाद भी अनधिकृत पहुंच बनी रह सकती है। चीन ने आरोपों से किया इनकार चीन ने इस मामले में अपनी भूमिका से इनकार किया है। वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि चीन कानून के अनुसार हैकिंग गतिविधियों का विरोध करता है और उनसे निपटता है। साथ ही, उन्होंने साइबर सुरक्षा के मुद्दों के बहाने चीन पर आरोप लगाने और उसे बदनाम करने का भी विरोध किया। यह मामला एआई आधारित टूल के दोहरे इस्तेमाल को सामने लाता है। ऐसे टूल सुरक्षा जांच को तेज कर सकते हैं, लेकिन गलत हाथों में पड़ने पर बड़े स्तर पर साइबर हमलों में भी इस्तेमाल हो सकते हैं।

स्रोत: मूल खबर पढ़ें

लेखक के बारे में

Adesh Gupta · News9 Nation के संपादक। देश-दुनिया की ताज़ा खबरों का विश्लेषण और लाइव अपडेट।