<p style=”text-align: justify;”><strong>Hariyali Amavasya 2026 Date: </strong>मानसून (Monsoon) की शुरुआत होती है, भारतीय पर्व-त्योहारो की झड़ी लग जाती है. खासकर सावन महीने में कई महत्वपूर्ण पर्व-त्योहार पड़ते है और इन्हीं में एक है हरियाली अमावस्या. सावन महीने की कई पवित्र और महत्वपूर्ण तिथियों में हरियाली अमावस्या को प्रकृति पर्व के रूप में भी जाना जाता है. इस दिन पितृ तर्पण और शिवजी की पूजा (Shiv Puja) का महत्व होता है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>सावन हरियाली अमावस्या कब (Hariyali Amavasya 2026 Kab hai)</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>सावन महीने में हरियाली अमावस्या इस बार बुधवार 12 अगस्त 2026 को पड़ रही है. अमावस्या तिथि की शुरुआत 12 अगस्त रात 01:55 पर हो जाएगी और देर रात 11 बजे के करीब समाप्त होगी. 12 अगस्त को पूरे दिन अमावस्या तिथि रहेगी और इसी दिन स्नान-दान व पूजा-पाठ किए जाएंगे. हरियाली अमावस्या पर पितरों के निमित्त तर्पण (Pitru Tarpan), पौधारोपण, दान और पूजन का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है.</p>
<p><iframe title=”YouTube video player” src=”https://www.youtube.com/embed/jEMwmtNvMz0?si=qQ22dYA9ZaLqnF1e” width=”560″ height=”315″ frameborder=”0″ allowfullscreen=”allowfullscreen”></iframe></p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>क्यों इस बार खास रहेगी हरियाली अमावस्या</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>हरियाली अमावस्या सावन (Sawan 2026) महीने में पड़ती है, जिससे कि इसे अधिक शुभ फलदायी माना जाता है. लेकिन इस बार हरियाली अमावस्या पर सूर्य ग्रहण लग रहा है. 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या के दिन ही <a title=”साल 2026″ href=”https://www.abplive.com/topic/new-year-2026″ data-type=”interlinkingkeywords”>साल 2026</a> का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2026) लगेगा. लेकिन पूजा-पाठ और तर्पण आदि पर ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. भारतीय समयानुसार, रात 8 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और मध्य रात्रि रात 1 बजकर 7 मिनट पर समाप्त होगा.</p>
<p style=”text-align: justify;”>ये भी पढ़ें: <strong><a href=”https://www.abplive.com/astro/sawan-2026-august-two-eclipses-in-15-days-surya-grahan-and-chandra-grahan-date-time-in-india-3139295″>Sawan Grahan 2026: सावन 2026 में दो ग्रहण का संयोग, क्या खतरे की घंटी का संकेत?</a></strong></p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>हरियाली अमावस्या का उत्सव</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>हरियाली अमावस्या का उत्सव उत्तर भारत के साथ ही देशभर के कई हिस्सों में मनाया जाता है. इस तिथि पर राजस्थान और उत्तर प्रदेश के मंदिरों, नदियों के तट और धार्मिक स्थलों पर विशेष भीड़ होती है. वहीं हिमाचल प्रदेश में इस दिन देवस्थानों पर विशेष पूजन और मेलों की परंपरा है. हरियाली अमावस्या पर कृष्ण मंदिरों में भी विशेष कार्यक्रम होते हैं. वृन्दावन के बांकेबिहारी मंदिर (Banke bihari mandir) में फूल बंगला (Fool bangla) उत्सव का समापन भी हरियाली अमावस्या पर समाप्त होता है. शिव मंदिरों में इस दिन महाकाल (Mahakaal) का विशेष शृंगार, अभिषेक और आरती होती है.</p>
<p><strong>अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (</strong><strong>FAQ</strong><strong>)</strong></p>
<p><strong>हरियाली अमावस्या </strong><strong>2026 </strong><strong>कब मनाई जाएगी</strong><strong>?</strong><br />हरियाली अमावस्या सावन मास में बुधवार 12 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी.</p>
<p><strong>हरियाली अमावस्या का क्या महत्व है</strong><strong>?</strong><br />हरियाली अमावस्या पर पितृ तर्पण, भगवान शिव की पूजा, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और वृक्षारोपण का खास महत्व होता है.</p>
<p><strong>हरियाली अमावस्या पर क्या करना चाहिए?</strong> <br />इस दिन स्नान, पितृ तर्पण, शिवलिंग अभिषेक, दान और वृक्षारोपण करना शुभ माना जाता है.</p>
<p><strong>हरियाली अमावस्या पर कौन से पौधे लगाएं?<br /></strong>हरियाली अमावस्या पर तुलसी, आंवला, नीम, पीपल जैसे पौधों का रोपण लाभकारी होता है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>ये भी पढ़ें: <strong><a href=”https://www.abplive.com/lifestyle/religion/pehla-sawan-somwar-2026-date-sawan-month-first-monday-vrat-shiv-puja-yog-shubh-muhurat-in-hindi-3138454″>Sawan 2026: सावन कब शुरू होगा, किस दिन पड़ रहा पहला सोमवार, डायरी में नोट कर लें तारीख</a><br /></strong><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि <span class=”skimlinks-unlinked”>ABPLive.com</span> किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>






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