<p style=”text-align: justify;”><strong>Vaishakh Buddha Purnima Vrat Katha in Hindi: </strong>शुक्रवार 1 मई को आज बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार मनाया जा रहा है. बता दें कि, वैशाख महीने की पूर्णिमा को ही बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है. इस दिन स्नान-दान और पूजा पाठ का विशेष महत्व शास्त्रों में बतलाया गया है. साथ ही आज के दिन व्रत रखने वाले जातक पूजा में वैशाख पूर्णिमा से जुड़ी इस व्रत कथा का पाठ जरूर करें.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>वैशाख बुद्ध पूर्णिमा की कथा</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>पौराणिक कथा के अनुसार, कांतिका नामक नगर में चंद्रहास्य नामक राजा राज्य करता था. उसी नगर में धनेश्वर नामक ब्राह्मण भी अपनी पत्नी के साथ रहता था. ब्राह्मण के घर घन-धान्य की कोई कमी न थी, लेकिन वे संतान सुख से वंचित थे. जिस कारण उन्हें अपना जीवन अधूरा सा लगता था.</p>
<p style=”text-align: justify;”>कांतिका नगर में एक साधु आता और वह घर-घर मिक्षा मांगने लगा. भिक्षा मांगने के बाद साधु गंगा तट के पास बैठकर भोजन किया करता था. वह साधु गांव के प्रत्येक घर से भिक्षा लेता, लेकिन ब्राह्मण धनेश्वर के घर पर भिक्षा लेने कभी भी नहीं जाता था. ब्राह्मण दंपती ने एक बार साधु से पूछा कि, वे उनसे भिक्षा क्यों नहीं मांगते, इसका क्या कारण है?</p>
<p style=”text-align: justify;”>साधु ने कहा, तुम निसंतान हो और शास्त्रों में ऐसे लोगों से अन्न लेना उचित नहीं माना जाता है. साधु के मुख से ऐसी बात सुनकर दंपती को बहुत दुख हुआ. उन्होंने साधु के सामने हाथ जोड़कर संतान सुख की प्राप्ति के लिए उपाय पूछा. साधु ने दंपती को 16 दिनों तक मां चंडी की उपासना करने का उपाय बताया.</p>
<p style=”text-align: justify;”>कथा के अनुसार, ब्राह्मण दंपती की पूजा और भक्ति से प्रसन्न होकर मां काली प्रकट हुईं और उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया. मां काली ने कहा कि, प्रत्येक पूर्णिमा पर दीपक जलाना और दीपकों की संख्या हरेक पूर्णिमा पर बढ़ाते जाना, जबतक कि वो 32 न हो जाए.</p>
<p class=”abp-article-title” style=”text-align: justify;”><a href=”https://www.abplive.com/astro/lunar-eclipse-2026-may-buddha-jayanti-kya-vaishakh-purnima-par-chandra-grahan-laga-hai-3122489″><strong>Purnima Chandra Grahan 2026: वैशाख पूर्णिमा पर आज चंद्र ग्रहण लगेगा क्या, बुद्ध जयंती पर ग्रहण की चर्चा क्यों ?</strong></a></p>
<p style=”text-align: justify;”>ब्राह्मण दंपती प्रत्येक पूर्णिमा पर यह उपाय करने लगे और कुछ ही समय बाद सुशीला ने एक सुंदर पुत्र को जन्म दिया. ब्राह्मण दंपती ने पुत्र का नाम देवीदास रखा. समय बीतने लगा और देवीदास बड़ा हुआ. शिक्षा ग्रहण करने के लिए उसे काशी भेजा गया. लेकिन काशी में उसके साथ एक विचित्र घटना घटी. वहां अनजाने में उसका विवाह करा दिया गया. देवीदास ने बताया कि, वह अल्पायु है. लेकिन इसके बावजूद भी विवाह नहीं रोका गया</p>
<p style=”text-align: justify;”>कुछ समय बात काल देवीदास के प्राण लेने आया तो असफल रहा. काल ने यमराज को सूचना दी. यमराज भगवान शिव और माता पार्वती के पास पहुंचे और देवदास के जीवन का रहस्य पूछा. उन्होंने बताया कि, देवीदास के माता-पिता ने पूर्णिमा का व्रत किया और मां काली के वरदान से उसे प्राप्त किया है. इसलिए काल का देवीदास पर कोई प्रभाव नहीं पड़ सकता है. इसके बाद से ही पूर्णिमा व्रत की शुरुआत मानी जाती है और कहा जाता है कि, पूर्णिमा का व्रत करने से कभी अकाल मृत्यु नहीं होती.</p>
<p style=”text-align: justify;”>ये भी पढ़ें: <strong><a href=”https://www.abplive.com/lifestyle/religion/vaishakh-purnima-2026-date-30-april-or-1-may-kab-hai-buddha-purnima-snan-daan-timing-3121795″>Vaishakh Purnima 2026 Date: वैशाख पूर्णिमा आज, जानें स्नान-दान और पूजा का मुहूर्त</a><br /></strong></p>






Total views : 9982
Your IP Address : 216.73.216.133