कैसे लीक हो जाता है डेटा? पिछले कुछ दिनों में कई बड़ी घटनाएं

<p style=”text-align: justify;”><strong>How Data Leak Happens:</strong> पिछले कुछ दिनों में डेटा लीक की कई घटनाएं सामने आई हैं. ताजा मामले में Alibi Global Threat Intelligence Group की एक रिपोर्ट बताती है कि डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) और सेना से जुड़ा डेटा 8,000 डॉलर में <a title=”डार्क वेब” href=”https://www.abplive.com/technology/what-is-dark-web-and-why-using-it-could-lend-you-in-trouble-know-all-answer-in-this-tech-explainer-3096003″ target=”_self”>डार्क वेब</a> पर बेचा जा रहा है. लगभग 31GB का यह डेटा पिछले दो सप्ताह से डार्क वेब पर मौजूद है. DRDO ने इस रिपोर्ट की सत्यता की जांच करने की बात कही है. इससे पहले <a title=”बैंक ऑफर बड़ौदा का डेटा लीक” href=”https://www.abplive.com/business/bank-of-baroda-statement-on-customers-data-leak-on-dark-web-know-what-experts-said-ann-3166525″ target=”_self”>बैंक ऑफर बड़ौदा का डेटा लीक</a> हुआ था, जिसमें आधार कार्ड और अकाउंट से जुड़ी सेंसेटिव इंफोर्मेशन लीक होने की बात कही गई थी. पिछले महीने ऐप्पल की सप्लायर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का डेटा लीक होने की भी जानकारी सामने आई थी. आज हम जानेंगे कि डेटा लीक होता कैसे होता है और इसके पीछे क्या-क्या कारण होते हैं.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>डेटा लीक का क्या मतलब होता है?</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>डेटा लीक तब होता है, जब गलती से कोई सेंसेटिव इंफोर्मेशन गलत हाथों में पहुंच जाएगा. उदाहरण के तौर पर किसी क्लाउड स्टोरेज सर्वर में हुई गड़बड़ी से किसी सेंसेटिव इंफोर्मेशन तक अनऑथोराइज्ड लोग पहुंच सकते हैं. आमतौर डेटा लीक का सबसे बड़ा कारण इंसानी गलती होती है. जैसे किसी कर्मचारी से ईमेल या मैसेज के जरिए सेंसेटिव जानकारी लीक होना या अपने डिवाइस को अनलॉक या अनप्रोटेक्टेड छोड़ देना. हैकर्स ऐसी स्थिति का फायदा उठा सकते हैं. <br /><img src=”https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/07/28/0b50f5a83f671ff5374d78dd873c15e717852298234841164_original.jpeg” /></p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>डेटा लीक से कैसे अलग है डेटा ब्रीच?</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>मौटे तौर पर डेटा लीक और डेटा ब्रीच को एक समान ही माना जाता है, लेकिन दोनों में काफी अंतर है. डेटा लीक जहां आमतौर पर गलती या खराब डेटा सिक्योरिटी के कारण होता है, वहीं जब साइबर अटैक कर डेटा चुराया जाए तो उसे डेटा ब्रीच कहा जाता है. डेटा लीक होने के बाद डेटा ब्रीच की घटना हो सकती है, जिससे आर्थिक नुकसान हो सकता है और किसी कंपनी की छवि को भी भारी झटका पहुंच सकता है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>किन कारणों से होता है डेटा लीक?</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>ह्यूमन एरर-</strong> जैसा हमने ऊपर जिक्र किया है, इंसानी गलती से डेटा लीक होना कॉमन है. सेंसेटिव डेटा के मैनेजमेंट में लापरवाही, ईमेल या मैसेज भेजते समय गलत रिसीवर को चुन लेना, बिना ऑथोराइजेशन के किसी के साथ भी कॉन्फिडेंशियल इंफोर्मेशन शेयर कर देने जैसी चीजें डेटा लीक का कारण बन सकती है. 2021 में अमेरिकी शहर डलास में एक कर्मचारी की गलती के कारण 23TB का डेटा लीक हो गया था.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>फिशिंग-</strong> हैकर्स अपनी बातों में उलझाकर लोगों से पर्सनल डेटा हासिल कर लेते हैं. ईमेल में मलेशियस लिंक भेजकर ये किसी की पर्सनल जानकारी चुरा सकते हैं. इस तरीके से लॉग-इन क्रेडेंशियल भी चुराए जा सकते हैं, जो आगे चलकर बड़े अटैक के लिए यूज किए जा सकते हैं.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>इनसाइडर थ्रेट-</strong> किसी कंपनी, नेटवर्क, या संस्था में काम करने वाले लोग भी सेंसेटिव इंफोर्मेशन लीक कर सकते हैं. 2021 में ऐसा मामला सामने आया था, जब एक लॉ फर्म में काम कर रहे चार वकीलों ने कंपनी की सारी फाइल्स चोरी कर ली ताकि कंपीटिंग फर्म को नया ऑफिस खोलने में मदद मिल सके.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>तकनीकी खामी-</strong> आउटडेटेड सॉफ्टवेयर, कमजोर ऑथेंटिकेशन प्रोटोकॉल और आउटडेटेड सिस्टम भी डेटा लीक कारण बन सकते हैं. इनकी वजह से हैकर्स के लिए सेंसेटिव डेटा तक पहुंच बनाना आसान हो जाता है. इसके अलावा मिसकॉन्फिगर्ड API से भी डेटा लीक का खतरा बढ़ रहा है. खासकर क्लाउड और माइक्रोसर्विसेस आर्किटेक्चर में यह खामी बड़ा नुकसान कर सकती है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>डेटा इन ट्रांजिट-</strong> ईमेल और मैसेज के जरिए भेजे जा रहे डेटा को भी इंटरसेप्ट किया जा सकता है. एनक्रिप्शन जैसे प्रोटेक्शन मेथड के बिना सेंसेटिव इंफोर्मेशन लीक हो सकती है. इसी तरह डेटाबेस, क्लाउड और सर्वर आदि में स्टोर डेटा को भी अगर स्ट्रॉन्ग सिक्योरिटी न दी जाए तो लीक होने का डर रहता है. <br /><img src=”https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/07/28/c8bacc0609c6b64b20a24f62f2dd31e317852298552811164_original.jpeg” /></p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>यूज हो रहा डेटा भी हो सकता है लीक</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>आप जिस डेटा को यूज कर रहे हैं, कुछ सिचुएशन में वह भी लीक हो सकता है. अगर आप अनएनक्रिप्टेड सिस्टम यूज कर रहे हैं तो आपके डिवाइस में सेंध लगाना आसान हो जाता है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>ये भी पढ़ें-</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”><strong><a title=”गूगल पर दिख रही है Claude से हुई बातचीत, क्या बड़ी गड़बड़ हो गई?” href=”https://www.abplive.com/technology/claude-chats-on-google-what-is-the-matter-and-is-it-concerning-know-details-here-3166761″ target=”_self”>गूगल पर दिख रही है Claude से हुई बातचीत, क्या बड़ी गड़बड़ हो गई?</a></strong></p>

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