<p><strong>India Forex Reserve:</strong> भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश का विदेशी मुद्रा भंडार 1.08 अरब डॉलर की बढ़ोतरी के साथ मजबूत हुआ है. हालांकि, इस दौरान गोल्ड रिजर्व में गिरावट दर्ज की गई, जिसने कई लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब टोटल विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ रहा है तो सोने के भंडार में कमी क्यों आई? आइए इसे डिटेल से समझते हैं.</p>
<p><strong>विदेशी मुद्रा भंडार कितना बढ़ा?</strong><br />RBI के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 1.08 अरब डॉलर बढ़कर पिछले सप्ताह की तुलना में ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है. विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है, क्योंकि इसका उपयोग आयात, विदेशी कर्ज के भुगतान और मुद्रा विनिमय दर को स्थिर रखने में किया जाता है.</p>
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<p><strong>विदेशी मुद्रा भंडार कैसे बनता है?</strong><br />भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मुख्य रूप से चार प्रमुख हिस्सों में बंटा होता है. जैसे विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, गोल्ड रिजर्व, विशेष आहरण अधिकार, IMF में रिजर्व पोजिशन में ये बंटा होता है. इन सभी में होने वाले बदलाव के आधार पर कुल विदेशी मुद्रा भंडार घटता या बढ़ता है.</p>
<p><strong>गोल्ड रिजर्व में कमी की क्या है वजह?</strong><br />विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने के बावजूद गोल्ड रिजर्व में कमी आने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. यहां से आप कुछ खास कारण देखें- </p>
<p><strong>1. सोने की कीमतों में गिरावट</strong><br />RBI अपने गोल्ड रिजर्व का कैलकुलेशन अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों के बेसिस पर करता है. अगर वैश्विक बाजार में <a title=”सोने की कीमत” href=”https://www.abplive.com/gold-prices” data-type=”interlinkingkeywords”>सोने की कीमत</a>ें घटती हैं तो भले ही आरबीआई के पास सोने की मात्रा समान रहे, लेकिन उसकी डॉलर वैल्यू कम हो जाती है. इससे गोल्ड रिजर्व में गिरावट दिखाई देती है. </p>
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<p><strong>2. डॉलर के मुकाबले बदलाव</strong><br />विदेशी मुद्रा भंडार का आंकड़ा अमेरिकी डॉलर में जारी किया जाता है. अगर डॉलर की तुलना में दूसरी मुद्राओं या सोने के मूल्य में बदलाव होता है, तो उसका असर रिजर्व के मूल्यांकन पर भी पड़ता है.</p>
<p><strong>मुद्रा भंडार बढ़ना क्यों है अच्छी खबर?</strong><br />विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि देश की अर्थव्यवस्था के लिए पॉजिटिव बात मानी जाती है. इसके कई फायदे हैं, जैसे आयात भुगतान की क्षमता मजबूत होती है और रुपये पर दबाव कम करने में मदद मिलती है. साथ ही विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौरान देश को वित्तीय सुरक्षा मिलती है. इतना ही नहीं, बाहरी कर्ज के भुगतान में आसानी रहती है.</p>
<p><strong><a href=”https://www.abplive.com/business/gold-silver-price-today-25-july-2026-city-wise-22k-18k-gold-rate-list-in-hindi-3165382″>क्या सावन में सस्ता होगा सोना? जानें आज 25 जुलाई को कितना है सोने- चांदी का भाव</a></strong></p>
<p><strong>गोल्ड रिजर्व में कमी है चिंता की बात?</strong><br />केवल एक सप्ताह के आंकड़ों के आधार पर चिंता करने की जरूरत नहीं है. यदि गिरावट केवल मूल्यांकन की वजह से है, तो ये नॉर्मल प्रोसेस का हिस्सा माना जाता है. लंबी अवधि में RBI लगातार अपने गोल्ड रिजर्व और विदेशी मुद्रा भंडार के बीच संतुलन बनाए रखता है.</p>






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